खुलासा-ईरान में राजदूत रहते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के असहयोग से कश्मीर में जिहाद को बड़ावा मिला

पिछले कुछ दिनों पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी अपने वक्तव्यों के कारण समाचारों में रहे थे। पिछले वर्ष तो वे कट्टरपंथी इस्लामिक संस्था पीएफ़आई के कार्यक्रम में भी गए थे जिसकी काफी आलोचना हुई थी।

किन्तु अब जो खुलासा स्वराज्य मैगज़ीन के संपादक लेखक अरविंदन नीलकंदन ने अपने लेख में किया है वह सबसे बड़ा है।

अरविंदन जी ने अपने लेख में पूर्व रॉ अधिकारी श्री आर के यादव की पुस्तक “मिशन रॉ” के संदर्भ से लिखा है कि जब हामिद अंसारी 1990 से 1992 तक ईरान में भारतीय राजदूत थे तो वे भारतीय गुप्त एजेंसियों के लिए अत्यंत ही असहयोगी और हानिकारक थे। श्री यादव के अनुसार हामिद अंसारी तब अत्यंत ही असहयोगी रहे जब ईरानी गुप्तचर एजेंसी ने तेहरान में एक रॉ एजेंट को अगवा कर लिया था।

तब विपक्ष के नेता श्री अटल बिहारी वाजपाई ने अथक प्रयास कर प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा राव को संपर्क किया और भारतीय सरकार द्वारा ईरान पर दबाव बनने भारतीय अधिकारी रिहा हुए। किन्तु फिर भी ईरान में भारतीय कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

श्री यादव ने अपनी पुस्तक “मिशन रॉ” में स्पष्ट लिखा कि

“इस घटना के बाद रॉ के बहुत से कार्यक्रमों को झटका लगा क्योंकि हामिद अंसारी के असहयोग के कारण सभी अधिकारी अत्यंत असुरक्षित हो गए थे। रॉ कर्मियों ने कॉम मजहबी केंद्र के अंदर तक अपनी पहुँच बना ली थी जिससे वे उन कश्मीरी तत्वो पर दृष्टि रख सखें जिनकी गतिविधियां कश्मीर में सुरक्षा के लिए हानिकारक थी। किन्तु इस घटना ने उन्हे उस केंद्र में और अधिक पहुँच बनाने से रोक दिया।“

श्री यादव के अनुसार, अंसारी ने एक भारतीय सुरक्षा अधिकारी मुहम्मद उमर को तब शांत रहने के लिए भी कहा जब ईरानी गुप्तचर विभाग ने उमर को उनसे सहयोग करने के लिए कहा। जब उमर ने सहयोग करने से मना कर दिया तो उन्हे अगवा कर लिया गया और यातनायेँ दी गई। अंसारी आश्चर्यजनक रूप से शांत रहे और उमर को इस पर हो हल्ला करने को मना किया।

इस प्रकार रॉ को इन 2 वर्षो में जो झटका लगा उससे जम्मू और कश्मीर में जिहाद को अत्यंत बड़ावा मिला।

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श्री अरविंदन नीलकंदन का मूल लेख
https://swarajyamag.com/politics/hamid-ansari-and-pfi-the-iran-connection


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