जानिए सफल हिन्दू कार्यकर्ता कैसे बनें?-जितेंद्र खुराना

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जो भी मैंने एक हिन्दू कार्यकर्ता के रूप में सीखा है वह मैं अन्यों के लाभ के लिए साझा कर रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि कई लोग इससे भी अच्छा बता सकते हैं किन्तु मैं सबसे पहले लिख कर इस शृंखला को आरंभ कर रहा हूँ जिससे लाखों हिन्दू कार्यकर्ताओं को लाभ हो और वो मेरे और अन्यों के अनुभवों से सीख सकें, और उससे लाभ लेकर वो गलतियाँ न करें जो मैंने और अन्यों ने करी है। इसी से वे अधिक से अधिक कार्य सटीकता से और कम समय में अधिक सफलता से कर पाएंगे।

1-अपनी आय के स्त्रोत जैसे व्यापार, नौकरी इत्यादि को निरंतर रखें, उसे नष्ट न करें

हिन्दू सामाजिक विषयों पर कार्य करते हुए बहुत से युवा अपने व्यवसाय को नष्ट कर देते हैं। कुछ तो नौकरी भी छोड़ देते हैं जो बिल्कुल गलत है। कई को लगता है कि इससे वे अधिक समय दे पाएंगे किन्तु होता उलट है। अपने व्यवसाय को नष्ट करने की गलती मैंने भी करी थी और उसकी हानि भी झेलनी पड़ी। आपकी आय आपकी प्रमुख शक्ति है और इसे नष्ट कर आप अपने आप को नष्ट करते हैं। जब आप स्वयं नष्ट होंगे तो सामाजिक कार्य तो भूल ही जाइये। इससे आपका परिवार भी कष्ट पायेगा और आप व्यथित होंगें। इसलिये अपना व्यवसाय और आय निरंतर रखें जिससे आप अर्थ शक्ति से सशक्त रहें। भले आपका सामाजिक कार्य थोड़ा कम हो जाये किन्तु जितना भी कार्य होगा ठोस और निरंतर होगा। इससे आपका परिवार भी संतुलित रहेगा और सम्बन्धों में मिठास रहेगी। स्मरण रखिए कि आपका व्यवसाय नष्ट होते ही आप अपनी पत्नी, बच्चों और माता पिता के दोषी हैं इसलिए आपको सफलता मिलेगी ही नहीं। समाज को बचाने का अर्थ सभी परिवारों को बचाना है इसलिए आप अपने परिवार को सशक्त रखिए।

2-अपने कार्य के विषय पर पड़ते रहें, संबंधित विद्वानों से संपर्क रखें।

हमें अपने हिन्दू सामाजिक कार्य की सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिये उसके लिए हमें उससे संबंधित पुस्तकें और लेख पड़ते रहना चाहिये तभी हम कुछ सटीक कार्य कर पाएंगें। जैसे लव जिहाद के विरुद्ध कार्य करते हैं तो पता होना चाहिये कि लव जिहाद के लिए क्या हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। जैसे मुस्लिम युवा बन ठन कर लड़कियों के विद्यालयों के बाहर घूमते हैं, अपने को झूठा उदार दिखाने के लिए हाथ मे कलावा पहनते हैं, हिन्दू नाम भी रख लेते हैं। कुछ तो हिन्दू धर्म की थोड़ी जानकारी भी लेते हैं। आपको ये भी पता होना चाहिये कि लव जिहाद से हिन्दू लड़कियों की क्या दुर्गती हुई है। ऐसे कई उदाहरण प्रमाण सहित आपके पास होने चाहिए। इस्लाम में महिलाओं की स्थिति की भी जानकारी होनी चाहिये। स्त्रियों पर मौलानाओं के फतवे, जैसे इस्लाम मे स्त्री-पुरुष बराबर नही हैं, आदि पता होना चाहिए। इससे आप अपने विषय पर ठोस कार्यवाही कर पाएंगें।

3-आवश्यकतानुसार पुस्तकाल्य बनाएँ। विषय से संबंधित समाचारों से अवगत रहें।

अपने विषय से संबंधित पुस्तकों और लेखों का एक व्यक्तिगत संग्रह भी बनाएं और बढ़ाते रहें। विषय के विद्वानों से संपर्क बनाएं और अपडेट भी लड़ते रहें। ये जानकारियां ही आपको सफल बनाएंगी।

प्रतिदिन कुछ नया होता रहता है जैसे राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के साथ लव जिहाद हो गया। इसलिये संबंधित नवीनतम समाचारों से अवगत रहें और हानि पंहुचाने वाले तत्वों के नए हथकंडों और वर्तमान स्थिति को समझने के लिए इन समाचारों से सीखते रहें। ठोस समाचारों से आपका संदेश सशक्त होता है।

4-अपने कार्य पर केन्द्रित बैठकें करें, सोशल मीडिया का प्रयोग करें।

समाज में जागृति लाने के लिए और अपने लिए समर्थन खड़ा करने के किए विषय पर केन्द्रित बैठकें करें। बैठक में आए लोगों में से कुछ लोग आपके संगठन से भी जुड़ेंगे। बैठक न्यूनतम खर्चे पर हो। बैठक के लिए धन थोड़ा स्वयं और थोड़ा संगठन की सहायता से इकट्ठा करें। अगर अपने अपने विषय पर कोई छोटी पुस्तक लिखी है तो बैठक में आए लोगों को उसे खरीदने के लिए भी कहें। इससे आपके खर्चे भी निकलेंगे। धन के लिए धन संपन्न लोगों से अपने विषय की चर्चा करें। उन्ही में से कुछ लोग आपको सामाजिक कार्य के लिए आर्थिक सहायता भी करेंगे।

इसके साथ आज के निशुल्क और अत्यंत प्रभावी सोशल मीडिया जैसे फेस्बूक, टिवीटर और यूट्यूब का प्रयोग करें। इन पर अपने विषय की जानकारी लोगों में फैलाएँ। अपने विषय पर बनाए छोटे विडियो सबसे अधिक प्रभावी होते हैं इसलिए छोटे विडियो अपने मोबाइल कैमरा से ही बनाकर इन पर डालें।

5-अपने विषय, कार्यों और समस्या पर जागरूक करने के लिए पर लेख लिखें,

जैसे आप अपने कार्य पर आगे बड्ते जाएँ, अपना अध्ययन बड़ाते जाएँ तो उस पर लेख भी लिखें। ये लेख बहुत से उपलब्ध अच्छे पोर्टल्स जैसे हिंदुयभीयन।कॉम, हिन्दुत्व।इन्फो, रेवोल्त्प्रेस्स।कॉम, इत्यादि पर छप सकते हैं। इससे आप कम समय में, कम प्रयासों में सारे देश के हिन्दू समाज को जागृत कर पाएंगे और समस्या का यथा संभव निवारण कर पाएंगे। इन लेखों से पूरे भारत में आपकी पहचान भी बनेगी।

6-विषय के विरुद्ध कार्य करने वाले संगठनों की गतिविधियों से अवगत रहें।

हिन्दू सामाजिक विषयों के विरूद्ध कार्य करने वाले बहुत से लोग हैं। इसलिये उनकी गतिविधियों की जानकारी रखें। इसी से आप अपनी रणनीति बना पाएंगें। सभी मार्क्सवादी हिन्दू विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। ईसाई मिशनरियां भी हिन्दू धर्म को अपमानित करने वाले साहित्य छापते रहते हैं। इसलिये इन सभी की गतिविधियों से अवगत रहना चाहिये और आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने वाले लोगों तक जानकारी पंहुचानी चाहिये।

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7-विभिन्न हिन्दू संगठनों से सम्बन्थ बनाये और बढ़ाएं।

आपके विषय और अन्य विषयों पर भी कई संस्थाएं काम कर रही है। इसलिए अधिक से अधिक संगठनो से संबंध बनाएँ। उनमे कमियाँ ना ढूंढें। जितना हो सके, तालमेल बनाएँ।

8-न्यूनतम कानूनी ज्ञान रखें, वकील इत्यादि से भी संपर्क रखें।

आपको कार्य करते हुए ऐसी स्थितियों से सामना करना पड़ सकता है जब आपको कानूनी सहायता की आवश्यकता होगी। इसलिए पहले से कुछ वकील और मीडिया के लोगों से संबंध बना कर रखें जो समय पड़ने पर आपकी सहायता कर सकें।

9-परिवार को समय दें।

जैसा पहले बताया है कि अपना व्यवसाय निरंतर रखें और पारिवारिक खर्चों की पूर्ति करें। ऐसे ही पारिवारिक सम्बन्धों जैसे पत्नी, बच्चों और मातापिता को भी समय दें। पत्नी-बच्चों की आवश्यकताओं और समस्याओं पर ध्यान देना आपका कर्तव्य है इसलिए उन पर पूरा ध्यान दें। हो सकता कि आपकी पत्नी को आपका हिन्दू समाज के लिए कार्य पसंद न हो तो उनके सामने उसकी चर्चा न करें किन्तु उन पर पूरा ध्यान दें।

10-अपना वेद सम्मत आध्यात्मिक गुरु बनाएं। इष्ट देव का नामजप करें।

अंततः स्मरण रखिए कि आप हिन्दू धर्म के लिए कार्य कर रहे हैं इसलिए धर्म का ज्ञान भी रखिए। हिन्दू धर्म का मूल ईश्वरीय वेद हैं। जो भी नियम हैं वे वेद सम्मत बनाए गए हैं। जो वेद के बाहर है वह धर्म नहीं है। इसलिए आप वेद सम्मत अध्यात्मिक गुरु के शिष्य भी बनें। ऐसे गुरु जो वेदों का सम्पूर्ण ज्ञान रखते हों। केवल कर्मकांड बताने वाले जैसे फूल चड़ा दो, नारियल चड़ा दो ये बताने वाले गुरु नहीं होते। गुरु जीवन में मोक्ष पाने के मार्ग बताने वाले होते हैं जो वेदों से ही संभव है। ऐसे अपने इष्ट देव का नाम स्मरण करें। कलयुग में नाम स्मरण से अपने इष्टदेव के गुण हम में आते हैं इसलिए जब भी संभव जो थोड़ा थोड़ा अवश्य लें।

11-मीडिया में संपर्क बनाएं। मीडिया से लड़े नहीं, तालमेल बनाएं।

आज मीडिया जैसे समाचार पत्र, न्यूज़ पोर्टल और न्यूज़ चैनल का बहुत महत्व है। इसलिए इनसे संबंध बनाएँ। स्मरण रखिए कि इनसे लड़िए मत, अपितु तालमेल बनाइये। मीडिया का काम आपको सफल बनाना नहीं है अपितु आपके कार्य की जानकारी अपने प्लेटफोरम पर डालना है। इसलिए मात्र इतनी ही आशा रखिए। और मीठे संबंध बना कर रखिए।

12-मशीन न बनें, थोड़ा मनोरंजन भी करें।

हम मशीन नहीं हैं, मनुष्य हैं। इसलिए हमारा भी एक मनोविज्ञान है। हम भी तनाव और दुविधा में आते हैं। इसलिए मनोरंजन में भी करें। आजकल यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया हैं जिन पर कॉमेडी, हास्य कवि आदि के लाखो विडियो मिलेंगे। टीवी नहीं देख पा रहे हैं तो यूट्यूब से मनोरंजन करिए। मनपसंद गाने सुनिए। मशीन मत बनिए नहीं तो लक्ष्य से भटक जाएंगे। अपने लक्ष्य तो ध्यान में रखिए किन्तु अपने दिमाग और शरीर को भी संतुलित रखिए।

मुझे आशा है कि मेरे अनुभवों से कई लोगों को अपनी गलती का अनुभव होगा और वे सुधार करेंगे। मुझे ये अभी आशा कि मुझसे अधिक अनुभवी हिन्दू कार्यकर्ता इन विचारों में अपने विचार भी जोड़ेंगे और मुझे और अनेकों को और भी सीखने को मिलेगा। मैं अन्य कई हिन्दू कार्यकर्ताओं को इसके लिए अनुरोध भी करने वाला हूँ और यहाँ भी कर रहा हूँ कि अपने अनुभव दूसरों के लाभ के लिए साझा करें।

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जितेंद्र खुराना HinduAbhiyan.com के संस्थापक और हिन्दू जागरण अभियान के संयोजक हैं। Disclaimer: The facts and opinions expressed within this article are the personal opinions of the author. www.HinduAbhiyan.com does not assume any responsibility or liability for the accuracy, completeness, suitability, or validity of any information in this article.

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