एक गाय को बचाने में तीन गौभक्तों की मृत्यु, जितेंद्र खुराना द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मुआवज़े की शिकायत

एक वर्ष पूर्व 23 अप्रैल 2017 को inkhabar.com  में छपी रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर, उत्तरप्रदेश में तीन गौभक्त युवा अश्विनी (40), श्रावण (35) और अरुण (15) कुएं में गिरी एक गाय को निकालने के लिए कुएं में उतर गए थे और तीनों की कुएं में जहरीली गैस के कारण मृत्यु हो गई थी। साथ ही गाय भी मर गई थी।

यह एक दर्दविदारक घटना थी जो उत्तरप्रदेश सरकार की लापरवाही का परिणाम था।

ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले हरियाणा के फ़रीदाबाद में भी हुई थी तो हिन्दू मानवाधिकार कार्यकर्ता जितेंद्र खुराना ने राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग को शिकायत करके मुआवज़े की मांग करी थी। अधिक ढूंदने पर पिछले वर्ष जौनपुर, उत्तरप्रदेश में भी ऐसी घटना होने का पता लगा तो जितेंद्र खुराना जी ने उस घटना के लिए राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग को शिकायत कर तीन मृत गौभक्तों के लिए मुआवज़े की मांग करी है।

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साथ ही उन सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज करने की भी मांग करी है जिनकी लापरवाही से जानलेवा कुआं खुला रहा।

जितेंद्र खुराना ने ये भी निवेदन किया है कि भाजपा उत्तर प्रदेश सरकार पूरे राज्य में ऐसे खुले कुओं की सूची बनाए और उन पर उचित कार्यवाही करे जिससे ऐसी घटनाएँ दुबारा न हों।

साथ ही ये भी निवेदन किया गया है कि मानवाधिकार आयोग उत्तर प्रदेश सरकार से पूंछें कि ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए सरकार के पास जो भी व्यवस्था है उसके बारे में सरकार द्वारा जनजागरण में प्रचार किया जाये जिससे लोगों को पता चले कि ऐसी घटना होने पर किसे संपर्क किया जाये।

इस घटना से ये भी स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा उत्तर प्रदेश सरकार गायों को लेकर भी लापरवाह है। इस घटना में भी जब गाय कुएं में गिरी तो उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए थी कि गाय को बचाया जा सके। किन्तु अंत में गौभक्तों को ही प्रयास करना पड़ा जिसमे उन की जान चली गई।

माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी को भी ध्यान देना चाहिए कि गौरक्षकों को फर्जी कहना तो सरल है किन्तु गौभक्तों की भी प्रशंसा की जानी चाहिए

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